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What is immunity system in hindi

          What is immunity in hindi

     
What is immunity in hindi
What is immunity in hindi





Immunity क्या है इसका मतलब होता है रोग प्रतिरोधक यानि शरीर का बीमारियों से लड़नेे का क्षमता यहां हर जीव में जन्मजात से होता है


 रोग प्रतिरोधक कुदरत के द्वारा दिया हुआ एक प्रकार का एंटीबायोटिक होता है जो हमें बैक्टीरिया वायरस फंगल इंफेक्शन तथा बीमारियों से बचाता है तथा यहां रोग प्रतिरोध की क्रिया सभी जीव के ऊपर लागू होता है

और इसका मात्रा सब में अलग अलग होता है किसी में ज्यादा तो किसी में कम होता है जब कोई बैक्टीरिया तथा वायरस हमारे शरीर में घुसता है तो यहां रोग प्रतिरोधक   उसे खत्म कर देता है


रोग प्रतिरोध के लिए शरीर का कुछ अंग का महत्वपूर्ण योगदान रहता है रहता है तो चलिए एक के बाद एक उनके बारे में जानते हैं

               


               External immunity



यह वह रोग प्रतिरोधक होता है जो शरीर के बाहरी हिस्सा से जुड़ा होता है जैसे हमारे बॉडी स्किन

External रोग प्रतिरोधक बाहरी बॉडी का स्किन होता है स्किन में एक प्रकार का लेयर होता है जो एंटीबायोटिक होता है बैक्टीरिया या फिर वायरस हमारे स्क्रीन के संपर्क में आता है तो यहां लेयर एक्टिवेट हो जाता है जिसके चलते वहां बैक्टीरिया खत्म हो जाता है

यहां कार्य कैसे करता है-यह रोग प्रतिरोधक सेंस के माध्यम से काम करता है जब हमारे स्किन में कोई भी बैक्टीरिया टच होने पर सेंस दिमाग़ को संदेश भेजता है जिससे दिमाग स्किन लेयर को एक्टिवेट कर देता है


         
                Internal immunity


Internal रोग प्रतिरोधक का कार्य में शरीर का कई अंग का योगदान रहता है

1. आंख- आंख देखने में नाजुक चीज है लेकिन इसके रास्ते से कोई बैक्टीरिया वायरस या फिर कीटाणु अंंदर नहीं जाा सकता क्योंकि आंख क्षार उत्पन्नन करता है जिसमें बैक्टीरिया पहुंंच ते साथ खत्म हो जाता है


2. फेफड़ा-यहां भी शरीर के रोग प्रतिरोधक  के रूप में कार्य करता है जब कोई बैक्टीरिया सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश करने के कोशिश करते है तो फेफड़ा में ऑक्सीजन का प्रेशर बनता है और वहां बाहर की तरह हिट करता है जिसे हम नॉर्मल भाषा में छिके आना बोलते हैं इसमें वायु का रफ्तार बहुत अधिक होता है जिसके कारण श्वास नली में घुसने वाले बैक्टीरिया बाहर हो जाता है



आम तरीकों से छीके दो रीजन से आता है एक तरे पदार्थ है जैसे मिर्च मसाले के सुघन से और दूसरा बैक्टीरिया या वायरस श्वास नली के संपर्क में आने से



3. लीवर-शरीर के रोग प्रतिरोध में इस अंग का भी अहम रोल होता हैं इसका काम होता है टॉक्सिन बनाना वैसे तो लिवर कई तरह काम करता है जैसे-खाना को पचाना बल्ड में ग्लूकोस को नियंत्रण करने के लिए इंसुलिन बनाना आदि लेकिन लिवर बीमारियों से लड़ने के लिए टॉक्सिन भी बनाता है और टॉक्सिन बनाने पर लीवर का तापमान बढ़ जाता है जिसकेेेे कारण शरीर में बुखार आता है जिससे लीवर का तापमान 98.3c ऊपर चला जाता है




4.सेल-रोग प्रतिरोध के लिए दो प्रकार का सेल का योगदान रहता है एक लाल रक्त कोशिका और दूसरा श्वेत कण कोशिका यहांं दोनों कोशिका खुद वायरस और बैक्टीरिया सेे
लड़ता है और अन्य कोशिकाओं को रिपेयर भी करता है




4. आत- रोग प्रतिरोधक  पावर में इसका भी हाथ होता है यहां शरीर तथा बल्ड में अपशिष्ट पदार्थ को जाने से रोकता है और कुछ बैक्टीरिया बचकर आ जाता है तो उसे ये खत्म कर देता है



5. दिमाग-इसका और अधिक भूमिका होता है रोक प्रतिरोध क्षमता को मेंटेन रखने में दिमाग ही शरीर का हर अंग को कंट्रोल करतेे हैं कोई भी विषाणु या जीवाणु शरीर के संपर्क में आने पर दिमाग को सिग्नल मिल जाता है और यहां कई प्रकार का केमिकल रिलीज करता है इसमें से एक केमिकल होता है एंटीबायोटिक जो शरीर को खुद ठीक होने के लिए इसका उपयोग लेता है और शरीर को स्वास्थ्य रखनेे में इसका बहुत बड़ा रोल होता है




                Out External immunity


यहां रोग प्रतिरोधक वह रोगप्रतिरोध होता है जो हमारे शरीर द्वारा ना बना कर बाहर से प्रदान किया जाता है जैसे बचपन में हमें कई प्रकार का टीका लगाया जाता है जिसमें टिटनेस एंटीफंगल आदि यहां सभी टीका जीवन भर कई बीमारियों से लड़ने का रोग प्रतिरोधक प्रदान करते हैं और साथ में पोलियो का गुथ भी पिलाया जाता है पोलियो शरीर के संरचना को ठीक ढंग से बनाने में मदद करते हैं और हमारी तबीयत खराब होने पर डॉक्टर द्वारा एंटीबायोटिक का इंजेक्शन देता है यहां बाहरी एंटीबायोटिक शारीरिक एंटीबायोटिक का बीमारियों में लड़ने में मदद करता है




 

      रोगप्रतिरोधक होने का लक्षण


वैसे तो रोग प्रतिरोध क्षमता का कम होने का कई लक्षण है इनमें से हम कुछ को बतलाते हैं

जल्दी-जल्दी खांसी जुकाम हो जाना बार बार बुखार आना मौसम के उतार-चढ़ाव में बार-बार तबीयत का खराब होना यहां सब लो रोग प्रतिरोधक का लक्षण होता है



 

 

   रोगप्रतिरोधक कम होने के कारण


1. पुरी नींद न लेना- नींद हमारे रोग प्रतिरोध पर काफी असर डालता है सामान्य व्यक्ति को 7-8 घंटा सोना जरूरी होता है


2. खानपान- हमारे खानपान से भी रोग प्रतिरोधक असर होता है गलत खानपान रोग प्रतिरोधक सिस्टम को बिगड़ सकता है


3. तनाव तथा चिंता- यह रोग प्रतिरोध का काम होने का सबसे बड़ा कारण है इस




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